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Valentine Day: समाज से ऊपर उठकर दोनों ने रचाई शादी, बोली- विधवा होने के बाद जीवन खत्म नहीं होता– News18 Hindi


कानपुर. प्रेमी-प्रेमिकाओं (Sweethearts) के त्योहार वैलेंटाइन डे (Valentine’s Day) के मौके पर कानपुर (Kanpur) में एक ऐसी ही अनोखी प्रेम कहानी लोगों की चर्चा का विषय बनी हुई है. जहां प्यार में न उम्र की परवाह की गयी, न जाति और समाज के लोगों की. इस अनोखे प्यार की शुरूआत तब हुई जब युवक महिला की बेटी की शादी में शरीक होने गया था. पहली मुलाकात के बाद दोनों ऐसा प्यार हुआ कि वह सब कुछ भूल कर एक हो गए. जाति, उम्र और समाज के बंधनों को तोड़ उन्होंने शादी कर ली.

बता दें कि कानपुर निवासी समाजसेवी बिंदू सिंह और प्राइवेट काम करने वाले सर्वोत्तम तिवारी का लव अफेयर कैसे सात जन्मों के बंधन में बंध गया. दरअसल बिंदू के पति की मौत 2008 में हो गयी थी. जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ा कर काबिल बनाया. बेटी की शादी उन्होंने 2017 में की थी. बेटी की शादी के समारोह में ही सर्वोत्तम अपने दोस्तों के साथ शामिल होने गया था. अपनी उम्र से कई साल बड़ी और बेवा बिंदु से उनकी मुलाकात यहीं पर हुई. जिसके बाद दोनों में दोस्ती हो गई.

विरोध के बावजूद 2018 में की शादी

बिंदू बीमार हुई तो सर्वोत्तम ने दोस्त से बढ़ कर उनकी मदद की. उनकी दोस्ती कब प्यार में बदल गई उन्हें पता नहीं चला. सर्वोत्तम ने बिंदू से अपने प्यार का इजहार किया तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया. जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया. दोनों के ही परिवार वाले इस बेमेल शादी के लिए तैयार नहीं थे. सभी विरोधों को दरकिनार कर दोनों ने 2018 में शादी कर ली. सर्वोत्तम अब बिंदू के परिवार के साथ रहते हैं और दोनों काफी खुश हैं.

जिन्दगी में आया नया मोड़
बिंदू सिंह का कहना है कि वह अपनी शादी के बाद काफी खुश हैं. उनका कहना है कि सर्वोत्तम के मिलने के बाद जिन्दगी में नया मोड़ आया. हमने टीन एजर्स वाला प्यार नहीं किया. हमारी शादी लोगों के लिए मिसाल है. विधवा होने के बाद जीवन खत्म नहीं हो जाता है. अपनी उम्र से बड़ी, बेवा और एक शादीशुदा बेटी की मां से शादी करना सर्वोत्तम के लिए आसान नहीं था. सर्वोत्तम के घर वालों ने इस शादी को स्वीकार नहीं किया.

बेटी- दमाद करते हैं प्यार

बिंदू और सर्वोत्तम की शादी से पहले बिंदू की बेटी की शादी हो चुकी थी. ऐसे में बिंदू की बेटी और दमाद ने भी दोनों की शादी को स्वीकार कर लिया. अपनी उम्र से कुछ छोटे बेटी और दमाद को पाकर सर्वोत्तम काफी खुश हैं. सर्वोत्तम का कहना है कि बेटी और दमाद उन्हें काफी प्यार करते हैं. वह भी दोनों को अपना बेटी दमाद मानते हैं और एक साथ परिवार के रूप मे रहते हैं. सर्वोत्तम का कहना है कि वह शादी ही नहीं करना था. बिंदू के जिन्दगी में आने के बाद शादी करने का फैसला लिया. इस शादी की वजह से कई अपने रूठ गए. शादी के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती, उम्र महज एक आकड़ा है. रिश्ते में प्रेम भाव, समर्पण और आपसी तालमेल होना चाहिए.





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