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छोटे से गांव के लाल का बड़ा कमाल, पहले ही प्रयास में यूपीएससी में पाई 49वीं रैंक


मनीष की मां ने वसुंधरा भारती ने कहा की उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मेरा बेटा इतनी बड़ी सफलता को प्राप्त कर लिया है. इसे कभी पढ़ने के लिए नहीं कहना पड़ता था .बल्कि डांट ही पढ़ती थी कि अब सो जाओ.

छोटे से गांव के लाल बड़ा कमाल. पहले ही प्रयास में यूपीएससी में 49वीं रैंक लेकर जिला ही नहीं देश भर में अपने राज्य का नाम रौशन किया. मनीष आईएएस बनकर देश की सेवा करना चाहता है. इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता ,पिता ,छोटी बहनों और दोस्तों को दिया.

मुंगेर. अनुमंडल मुख्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर विषय गांव के निरंजन कुमार साह के पुत्र मनीष कुमार ने 2020 के संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 49 वां रैंक लाते हुए सफलता प्राप्त की है. मनीष कुमार बीटेक की पढ़ाई के बाद यूपीएससी की परीक्षा में भाग्य आजमाना चाहता था .उसने पहले प्रयास में ही यह सफलता प्राप्त की है.

इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई उसने स्थानीय शिक्षण संस्थानों से ही प्राप्त किया है . तारापुर शहर के प्राइवेट शिक्षण संस्थान पारामाउंट एकेडमी से उसने स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी.यूपीएससी की परीक्षा में परचम लहराने वाले मनीष कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय माता वसुंधरा भारती पिता निरंजन कुमार साह दोनों छोटी बहनों मनीषा एवं मौसम तथा दोस्त विजित राजपूत को दिया.

माता पिता की सहमति से मैंने नौकरी छोड़ दी
मनीष कुमार ने कहा कि 12वीं की पढ़ाई के बाद से ही मेरी इच्छा थी की इंजीनियरिंग सेवा में जाऊंगा. बीटेक की पढ़ाई के बाद जॉब लगने के बाद माता पिता की सहमति से मैंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली में प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने लगा. एक साल हमने तैयारी की और पहले प्रयास में मुझे सफलता मिली. जिसमें मुझे 49 वां रैंक मिला .जो मुझे काफी अच्छा लग रहा है.आगे की योजना के बारे में कहा कि इसमें रहकर कुछ अच्छा करना चाहते हैं. बड़े बड़े प्रोजेक्ट होते हैं जिसमें हम अपना योगदान दे सके. जिससे देश का मान बड़े. 12 अप्रैल को परिणाम निकला है. मैं बाहर घूमने गया हुआ था. हम लोगों का एक टेलीग्राम ग्रुप है. जिस पर हमारे साथियों ने रिजल्ट को डाला था.

मैं सिर्फ यह देखना चाह रहा था उसमें मेरा नाम है या नहीं तो मेरा नाम उसमें था. तब हमने रैंक की तलाश की तो मेरी 49वीं था. अपनी प्रारंभिक पढ़ाई के संबंध में कहा कि तारापुर के पारामाउंट एकेडमी में 10 वीं की पढ़ाई किया. फिर ढाका मोड में इंटर की पढ़ाई की. फिर बीटेक की पढ़ाई एनआईटी वारंगल से किया. मैं दिल्ली मेड ईजी में तैयारी के लिए चला गया. यह मेरा मेरा पहला प्रयास था जिसे मेरा सिलेक्शन हुआ है.

कभी पढ़ने के लिए नहीं कहना पड़ा
मनीष की मां ने वसुंधरा भारती ने कहा की उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मेरा बेटा इतनी बड़ी सफलता को प्राप्त कर लिया है. इसे कभी पढ़ने के लिए नहीं कहना पड़ता था .बल्कि डांट ही पढ़ती थी कि अब सो जाओ. सारा श्रेय अपने पुत्र के मेहनत खो देती हैं. जिसने इमानदारी से कड़ी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई की .पुत्र की सफलता से परिवार के सभी सदस्य काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.

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प्राइवेट कंपनी में कार्यरत पिता निरंजन कुमार साह ने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है. मेरे पुत्र का शुरू से इच्छा थी कि वह आईआईटी से पढ़ाई करें. मेरी सामर्थ्य उस समय नहीं थी. बच्चे के लगाव को देखते हुए हमने पूरी कोशिश किया. भगवान को धन्यवाद करते हैं उन्होंने मुझे इतनी सामर्थ्य प्रदान किए.




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